Rajasthan Nikay Chunav 2026: कहीं पार्षदों की घेराबंदी, कहीं हंगामा; 273 निकायों में आज खुलेगा अध्यक्षों का पिटारा

News Desk

जयपुर। राजस्थान की नगर राजनीति में आज वह दिन है जब पिछले कई दिनों से होटल, रिसॉर्ट, बैठकों और बंद कमरों में चल रहा नंबरों का खेल आखिरकार वोटिंग मशीनरी के सामने पहुंचेगा। प्रदेश के 273 नगरीय निकायों में सोमवार को मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए मतदान हो रहा है। वोटिंग सुबह 10 बजे शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चलेगी और इसके तुरंत बाद मतगणना शुरू होगी। यानी दोपहर बाद तस्वीर साफ होने लगेगी कि किस शहर की ‘कुर्सी’ किस खेमे के खाते में गई।

हालांकि आज का चुनाव कुल 305 निकायों की कहानी का अगला अध्याय है। नामांकन वापसी के बाद 32 निकायों में मेयर या अध्यक्ष निर्विरोध चुने जा चुके हैं, इसलिए बाकी 273 निकायों में आज मुकाबला हो रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार इन 273 निकायों में 5 नगर निगम, 24 नगर परिषद और 244 नगर पालिकाएं शामिल हैं।

सुबह मतदान शुरू होते ही कई जगहों से राजनीतिक गहमागहमी की तस्वीरें सामने आने लगीं। श्रीगंगानगर जिले के श्रीविजयनगर में मतदान से पहले माहौल तनावपूर्ण होने की खबर है। स्थानीय रिपोर्टों में कांग्रेस समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की बात सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में फायरिंग और पार्षदों को जबरन ले जाने जैसे आरोप भी बताए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच अलग विषय है, इसलिए फिलहाल इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है। चुनाव से पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने भी श्रीविजयनगर समेत कुछ निकायों से जुड़े मामलों में पार्षदों को अंतरिम राहत दी थी।

अजमेर में भी मेयर चुनाव शुरू होने से पहले निगम परिसर के बाहर हंगामे की स्थिति बनी। यहां कांग्रेस की किरण गढ़वाल और भाजपा की अनामिका शर्मा के बीच मुकाबला है। दोनों दलों के बीच तनातनी नई नहीं है। नामांकन जांच के दौरान भाजपा ने गढ़वाल के खिलाफ निगम की कथित बकाया राशि को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। कई घंटे चली सुनवाई और कानूनी राय के बाद निर्वाचन अधिकारी ने आपत्ति खारिज कर दी और गढ़वाल का नामांकन वैध माना। आज वही मुकाबला मतदान तक पहुंच चुका है।

अजमेर में असली गणित भी दिलचस्प है। नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और निर्दलीयों के 11 पार्षद हैं। बहुमत के लिए 41 वोट चाहिए। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों की नजर निर्दलीयों पर है। कांग्रेस ने पहले ही पांच निर्दलीयों के समर्थन का दावा किया था, जबकि भाजपा की रणनीति सार्वजनिक रूप से उतनी स्पष्ट नहीं रही। यानी यहां मुकाबला सिर्फ दो प्रत्याशियों का नहीं, बल्कि 11 निर्दलीय वोटों के आसपास घूमता दिखाई दे रहा है।

बीकानेर में भी मेयर की कुर्सी के लिए सीधा मुकाबला है। यहां कांग्रेस ने अनिल कल्ला और भाजपा ने सुरेंद्र सिंह शेखावत को मैदान में उतारा है। 80 सदस्यीय निगम में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और RLP का एक पार्षद है। मतदान से ठीक पहले कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की देर रात हुई सुनवाई भी चर्चा में रही। अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत दी, जिससे उनके मतदान को लेकर बनी आशंका फिलहाल टल गई।

उदयपुर और पाली में भी आज मेयर पद का फैसला होना है। इन शहरों में भी पार्टियों के लिए सबसे बड़ा सवाल अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखना और जरूरी समर्थन जुटाना है। पिछले दिनों राजस्थान के कई निकायों में पार्षदों को होटल और रिसॉर्ट में रखने की खबरें सामने आती रही हैं। वजह साफ है—निकाय चुनाव में कई जगह बहुमत किसी एक दल के पास नहीं है और निर्दलीय पार्षदों का एक वोट भी पूरा समीकरण बदल सकता है।

इस चुनावी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि वार्ड चुनाव जीतना और नगर निकाय की कमान हासिल करना दो अलग-अलग गणित हैं पार्षदों के चुनाव में जिस पार्टी के पास ज्यादा सीटें आईं, जरूरी नहीं कि अध्यक्ष या मेयर की कुर्सी भी उसी के पास चली जाए। धौलपुर में इसका उदाहरण पहले ही सामने आ चुका है, जहां कांग्रेस के 27 पार्षद होने के बावजूद अध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया।

यही वजह है कि आज कई शहरों में वोटिंग शुरू होने से पहले ही असली चर्चा प्रत्याशियों से ज्यादा क्रॉस-वोटिंग, निर्दलीयों और संख्या बल की है। पार्टियां अपने पार्षदों को मतदान केंद्र तक लेकर पहुंच रही हैं, समर्थक बाहर मौजूद हैं और पुलिस ने भी कई संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई है। राजस्थान पुलिस ने निकाय प्रमुखों के चुनाव को देखते हुए अतिरिक्त बल, RAC और STF की कंपनियां तैनात की हैं।

उधर जयपुर, जोधपुर और कोटा के साथ सुकेत नगरपालिका को आज की प्रक्रिया से अलग रखा गया है। इन निकायों में EVM से जुड़ी तकनीकी समस्या और पुनर्मतदान के कारण मेयर/अध्यक्ष चुनाव बाद में कराया जा रहा है। इन चार निकायों में 25 सितंबर को मतदान होगा। यानी राजस्थान की पूरी निकाय चुनाव कहानी आज खत्म नहीं होगी; चार अहम निकायों का एक और अध्याय बाकी है।

आज मतदान खत्म होने के बाद दोपहर 2 बजे से मतगणना शुरू होगी। इसके साथ ही पिछले कई दिनों से चल रहे दावे, समर्थन पत्र, पार्षदों की मौजूदगी और राजनीतिक रणनीतियों का असली हिसाब सामने आएगा। जिस वोट को लेकर सुबह तक दावा था, वह शाम तक नतीजे का आंकड़ा बन जाएगा।

और फिर मंगलवार को कहानी का अगला हिस्सा शुरू होगा। जिन निकायों में आज मेयर, सभापति या अध्यक्ष चुने जाएंगे, वहां 22 सितंबर को उप महापौर, उपसभापति और उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव होगा। दूसरी तरफ जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत में 25 सितंबर का इंतजार रहेगा।

फिलहाल राजस्थान की 273 निकायों में बैलेट का हिसाब चल रहा है। कहीं बहुमत साफ है, कहीं निर्दलीय निर्णायक हैं और कहीं मुकाबला इतना करीबी है कि आखिरी वोट तक कहानी खुली है। सुबह तक राजनीति का गणित था, दोपहर बाद उसी गणित का रिजल्ट होगा।

Share This Article