जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बाड़मेर पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि 2023 के अंत में रिफाइनरी अधिकारियों ने उत्पादन 2024 तक शुरू करने का आश्वासन दिया था। फिर विलंब की बात कर 2024 तक का वादा किया गया, लेकिन अब 2026 में पीएम नरेंद्र मोदी को बुलाकर उद्घाटन की तैयारी है। गहलोत ने सवाल उठाया कि 2014-18 तक भाजपा ने प्रोजेक्ट क्यों रोका? चुनाव से पहले पीएम को बुलाकर शिलान्यास का ढोंग रचा, जबकि सोनिया गांधी व वीरप्पा मोइली ने पहले ही शिलान्यास कर दिया था। सात साल की देरी से लागत 37 हजार करोड़ से बढ़कर 80 हजार करोड़ हो गई—यह जनता का पैसा बर्बाद हुआ।
गहलोत ने वसुंधरा राजे को भी निशाने पर लिया, कहा कि उन्हें गुमराह कर बताया गया कि रिफाइनरी घाटे का सौदा है। राज्य को 26% भागीदारी क्यों जब पानी-जमीन-बिजली राज्य की? उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकारें भागीदारी नहीं लेतीं क्योंकि रिफाइनरी घाटे में जा सकती है, जबकि HPCL-IOC जैसी सेंट्रल PSU इसे संभाल सकती हैं। मजबूरी में 26% ली गई। विपक्ष में रहते उन्होंने राजे को समझाया था।
अब भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ पर तंज कसते हुए कहा कि जिन्हें रिफाइनरी का ‘ABCD’ तक नहीं पता, उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाकर हमला करवाया जा रहा। वसुंधरा राजे ही बोलने की हकदार हैं, क्योंकि उन्हें एग्रीमेंट की सच्चाई पता है। यह देश की सबसे हाई-टेक मॉडर्न रिफाइनरी व पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है, जिसके फायदे अनगिनत हैं। राठौड़ साहब पहले स्टडी-रिसर्च करें, केंद्र-राज्य से कमी ढूंढें फिर बोलें। रोजाना बयान व्यर्थ हैं।
रीको में प्लॉट कट रहे हैं, सड़कें बन गईं। गहलोत ने सलाह दी कि राजस्थानियों को 100-150 प्लास्टिक आधारित उद्योग लगाने का मौका दें, वरना गुजरात-बड़ौदा के अनुभवी बाहरवाले प्लॉट ले लेंगे। सिर्फ टैक्स-रेवेन्यू मिलेगा, असली फायदा लोकल रोजगार व उद्यमिता से होगा। उन्होंने कहा, भाजपा गलती कर रही—राजस्थान के युवाओं को उद्योगी बनाओ। यह बयान 21 अप्रैल को प्रस्तावित पीएम के उद्घाटन से ठीक पहले आया, जब सीएम भजनलाल शर्मा ने विस्तार का ऐलान किया। सियासी घमासान तेज है।
