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मोदी को साउथ की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए: अशोक गहलोत

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने दक्षिण भारत के तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा जताए गए गुस्से, रोष और आशंकाओं का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को […]

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने दक्षिण भारत के तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा जताए गए गुस्से, रोष और आशंकाओं का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साउथ की चिंताओं को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। गहलोत ने जानबूझकर कई बार दोहराया कि अगर दक्षिण के लोगों को यह महसूस हो गया कि उत्तर भारत वाले अनावश्यक रूप से थोप रहे हैं और उनकी स्थिति कमजोर कर रहे हैं, तो देश में स्थिति बिगड़ सकती है, जैसा कि 1950-60 के दशक में दक्षिण में हुए आंदोलनों के दौरान देखा गया था।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बयान को गहलोत ने बहुत खतरनाक संकेत बताया, जो दर्शाता है कि दक्षिण के लोगों के दिलों में आग लगी हुई है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा बेहद संवेदनशील है और सभी दल महिलाओं को संसद व विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं, लेकिन केंद्र सरकार का परिसीमन का तरीका गलत है। गहलोत ने सवाल उठाया कि 2021 की जनगणना समय पर क्यों नहीं हुई, जबकि यह संवैधानिक बाध्यता थी। सरकार ने एक के बाद एक बहाने बनाए, लेकिन अब सेंसस कमिश्नर 2027 तक जनगणना का वादा कर रहे हैं। फिर भी तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव चल रहे हैं, उसी बीच संसद सत्र बुलाकर जल्दबाजी क्यों की गई।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुझाव दिया था कि चुनाव समाप्त होने के बाद संसद बुलाएं, क्योंकि सभी नेता व्यस्त रहेंगे, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। गहलोत ने इसे षड्यंत्र करार देते हुए कहा कि मोदी सरकार महिला आरक्षण के नाम पर विपक्षी दलों को बदनाम करना चाहती है। अगर विधेयक पार नहीं होता, तो दोष विपक्ष पर डाला जाएगा, जो लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। 2011 की जनगणना को अचानक आधार बनाने का फॉर्मूला क्यों अपनाया गया? तीन साल पहले जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ था, तब खड़गे ने मांग की थी कि इसे तुरंत 2024 से लागू करें। सरकार ने तब 2021 की जनगणना का बहाना बनाया था, लेकिन अब वही पुराने 2011 के आंकड़ों पर परिसीमन कर रही है।

दक्षिणी राज्य जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने जनसंख्या नियंत्रण में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जिससे उनकी वृद्धि दर कम हुई, लेकिन पुरानी जनगणना के आधार पर उत्तर भारत को अधिक लोकसभा सीटें मिलेंगी। इससे दक्षिण की सीटें 39 से घटकर 33 रह सकती हैं, जो संसाधनों के असमान बंटवारे को जन्म देगा। गहलोत ने चेतावनी दी कि दक्षिण केंद्र को अधिक टैक्स देते हैं, लेकिन उनकी आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने केंद्र से अपील की कि नई जनगणना पूरी होने का इंतजार करें और परिसीमन आयोग को अद्यतन आंकड़ों का उपयोग करने दें। यह न केवल संवैधानिक मूल्यों का सवाल है, बल्कि राष्ट्रीय एकता का भी। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो अलगाववादी भावनाएं भड़क सकती हैं। राजनीतिक दलों को एकजुट होकर इस विवाद को सुलझाना चाहिए। गहलोत का बयान राजनीतिक हलकों में जोरदार बहस छेड़ रहा है। 

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