BJP और कांग्रेस के वोट शेयर का अंतर 1% से भी कम; कथित परिसीमन की अनियमितताएं न होतीं तो कांग्रेस 1,500 और वार्ड जीतती: डोटासरा
जयपुर । राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने रविवार को नगर निकाय चुनावों के नतीजों को BJP सरकार के लिए बड़ा झटका बताते हुए दावा किया कि शहरी स्थानीय निकायों में पार्टी का पारंपरिक दबदबा काफी कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम सरकार के कामकाज को लेकर जनता में बढ़ते असंतोष को दर्शाते हैं।
जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डोटासरा ने दावा किया कि नगर निकाय चुनावों में BJP और कांग्रेस के वोट शेयर के बीच का अंतर घटकर 1 प्रतिशत से भी कम रह गया है।
डोटासरा ने कहा कि 2014-16 के नगर निकाय चुनावों में, जब वसुंधरा राजे के नेतृत्व में BJP सरकार सत्ता में थी, तब BJP को कांग्रेस के मुकाबले 8.12 प्रतिशत अंक की बढ़त हासिल थी। वहीं, 2019-21 के दौरान अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के समय कांग्रेस को BJP पर 2.2 प्रतिशत अंक की बढ़त मिली थी। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा चुनावों में BJP की बढ़त घटकर 1 प्रतिशत से भी कम रह गई है।
उन्होंने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव में 188 विधानसभा क्षेत्रों में BJP को 42.41 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर 50.14 प्रतिशत हो गया। हालांकि, डोटासरा के अनुसार नगर निकाय चुनावों में BJP का वोट शेयर घटकर 35.3 प्रतिशत रह गया। उन्होंने इस गिरावट के लिए BJP सरकार के कथित “कुशासन” को जिम्मेदार बताया।
आरक्षित वार्डों में कांग्रेस का बढ़त का दावा
डोटासरा ने कहा कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित वार्डों में कांग्रेस का प्रदर्शन विशेष रूप से बेहतर रहा।
उनके अनुसार, कांग्रेस ने SC आरक्षित 542 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि BJP को 350 वार्डों में जीत मिली। इस तरह कांग्रेस को 192 वार्डों की बढ़त मिली।
SC महिला आरक्षित वार्डों में कांग्रेस ने 261 सीटें जीतीं, जबकि BJP को 186 सीटें मिलीं। यहां कांग्रेस की बढ़त 75 वार्डों की रही। इसी तरह ST महिला आरक्षित वार्डों में कांग्रेस ने 53 सीटें जीतीं, जबकि BJP के खाते में 39 सीटें आईं।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि BJP सरकार ने परिसीमन की प्रक्रिया मनमाने और अनियमित तरीके से कराई। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग वार्डों में मतदाताओं की संख्या में भारी अंतर देखने को मिला। कुछ वार्डों में करीब 4,000 मतदाता थे, जबकि कुछ में यह संख्या 35,000 तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि छोटे शहरी निकायों में भी इसी तरह की असमानताएं सामने आईं।
कम अंतर से हुई जीत पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि BJP ने जिन 4,097 वार्डों में जीत दर्ज की, उनमें से 1,316 वार्डों में जीत का अंतर 100 वोट से भी कम रहा।
उन्होंने कहा कि इनमें 772 वार्ड ऐसे थे, जहां BJP ने 50 से भी कम वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। वहीं, 13 वार्डों में BJP उम्मीदवार केवल एक वोट के अंतर से विजयी हुए।
डोटासरा ने आगे दावा किया कि कांग्रेस ने इन सभी 1,316 करीबी मुकाबले वाले वार्डों में पुनर्गणना की मांग की थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन वार्डों में कांग्रेस उम्मीदवार 200 से 300 वोटों से आगे चल रहे थे, वहां परिणाम जानबूझकर देरी से घोषित किए गए, ताकि BJP और मुख्यमंत्री के पक्ष में राजनीतिक माहौल बनाया जा सके।
अजमेर, पाली और बीकानेर में कांग्रेस के बढ़त के दावे
कई प्रमुख शहरों के नतीजों का हवाला देते हुए डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस ने BJP के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल की है।
अजमेर में कांग्रेस ने 80 में से 37 वार्ड जीते, जबकि BJP को 32 वार्डों में जीत मिली। डोटासरा ने इसे कांग्रेस की बढ़त बताया।
पाली में कांग्रेस ने 65 में से 29 वार्ड जीते, जबकि BJP को 21 वार्डों में जीत मिली।
बीकानेर को कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण जीत बताते हुए डोटासरा ने कहा कि पार्टी ने यहां 80 में से 42 वार्डों में जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बीकानेर केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का राजनीतिक आधार माना जाता है।
जोधपुर में कांग्रेस ने 45 वार्ड जीते, जो BJP से एक अधिक है। डोटासरा ने दावा किया कि जोधपुर में कांग्रेस को 42.7 प्रतिशत वोट मिले, जबकि BJP का वोट शेयर 39.8 प्रतिशत रहा।
जयपुर में कांग्रेस को अधिक वोट मिलने का दावा
डोटासरा ने कहा कि जयपुर के परिणामों ने भी परिसीमन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
उनके अनुसार, जयपुर में कांग्रेस को BJP की तुलना में 10,000 से अधिक वोट मिले, इसके बावजूद BJP ने अधिक वार्डों में जीत हासिल की।
उन्होंने इसका कारण कथित असमान परिसीमन को बताया। उदाहरण देते हुए डोटासरा ने कहा कि जयपुर के एक वार्ड में 13,499 मतदाता थे, जबकि दूसरे वार्ड में यह संख्या 32,272 थी।
उन्होंने दावा किया कि वार्डों के परिसीमन के दौरान मतदाताओं की संख्या में इतना बड़ा अंतर निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं होना चाहिए था।
मुख्यमंत्री के रोड शो वाले वार्डों में BJP की हार का दावा
डोटासरा ने उन वार्डों में भी BJP के प्रदर्शन का जिक्र किया, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चुनाव प्रचार किया था।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पाली के वार्ड संख्या 31, 32 और 34 में रोड शो किए थे, लेकिन BJP इन तीनों वार्डों में चुनाव हार गई।
भरतपुर का जिक्र करते हुए, जिसे मुख्यमंत्री का गृह जिला बताया गया, डोटासरा ने कहा कि BJP यहां 65 में से केवल 20 वार्डों में जीत हासिल कर सकी।
सांगानेर में उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को 38.8 प्रतिशत वोट मिले, जबकि BJP का वोट शेयर 35.9 प्रतिशत रहा।
झालावाड़ का जिक्र करते हुए डोटासरा ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह क्षेत्र में BJP आठ में से पांच शहरी निकायों में पूरी तरह पिछड़ गई और कांग्रेस को वोट शेयर में 4.9 प्रतिशत अंक की बढ़त मिली।
पंचायती राज चुनाव में BJP को झटका लगने की भविष्यवाणी
डोटासरा ने कहा कि नगर निकाय चुनावों के नतीजे BJP सरकार के प्रति जनता में बढ़ते असंतोष का संकेत हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि करीब ढाई साल के कार्यकाल में सरकार जनता से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित काम करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि BJP और RSS लंबे समय से शहरी स्थानीय निकायों को अपना मजबूत राजनीतिक आधार मानते रहे हैं, लेकिन नगर निकाय चुनावों के परिणाम बताते हैं कि पार्टी अपने इस पारंपरिक दबदबे को कायम रखने में सफल नहीं रही।
आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर डोटासरा ने BJP को एक और बड़े झटके की भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण मतदाता भी BJP सरकार के कामकाज पर अपना फैसला सुनाएंगे और चुनाव में जनता का रुख सरकार के खिलाफ देखने को मिलेगा।