JPSC-JSSC भर्ती घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा, OMR में हेरफेर से इंटरव्यू तक ‘सेटिंग’; करोड़ों की उगाही का आरोप

News Desk

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कथित भर्ती सिंडिकेट के काम करने के तरीके को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। CID और SIT की जांच में परीक्षा प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में कथित ‘सेटिंग’, OMR शीट में हेरफेर, उत्तरों में बदलाव और चयन के नाम पर अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये की वसूली के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब इन आरोपों को दस्तावेजी, डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों से जोड़ने में जुटी हैं।

जांच के मुताबिक, कथित सिंडिकेट की गतिविधियां केवल परीक्षा के दिन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि विज्ञापन जारी होने से लेकर अंतिम चयन और इंटरव्यू तक अलग-अलग स्तरों पर प्रभाव डालने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, आउटसोर्सिंग एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी को इस कथित नेटवर्क में अहम कड़ी माना जा रहा है। मामले में उनकी भूमिका को लेकर CID लगातार पूछताछ कर रही है और ED भी कथित वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।

अभय तिवारी को CID ने शनिवार को तीसरी बार तीन दिन की रिमांड पर लिया है। जांच में सामने आए बयानों के आधार पर आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के लिए कथित तौर पर रकम तय की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 11वीं से 14वीं JPSC परीक्षाओं में अंतिम चयन और इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के नाम पर बड़ी रकम लेने के आरोप हैं। 14वीं JPSC परीक्षा में सामान्य और OBC वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए करीब एक करोड़ रुपये और ST वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए करीब 80 लाख रुपये तक की कथित ‘रेट’ तय होने की बात जांच में सामने आई है। इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाले साक्ष्यों से होगी।

जांच में OMR शीट से कथित छेड़छाड़ का तरीका भी सामने आया है। डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद एबाद के बयान के अनुसार, कथित तौर पर चिन्हित अभ्यर्थियों की OMR शीट में कुछ उत्तरों के गोले खाली छोड़े जाते थे। इसके बाद आधिकारिक उत्तर कुंजी उपलब्ध होने पर स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन के दौरान इन खाली स्थानों में सही उत्तर दर्ज किए जाने का आरोप है। इसके लिए कथित तौर पर पहले से तय अभ्यर्थियों के रोल नंबर तकनीकी टीम तक पहुंचाए जाते थे। CID अब मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक मिलान कर रही है।

JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भी जांच में एक अलग तरह की कथित गड़बड़ी का जिक्र सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 12-12 लाख रुपये लिए गए और परीक्षा से पहले उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर इकट्ठा किया गया। वहां उन्हें करीब 65 प्रश्नों के उत्तर याद कराने का आरोप है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि परीक्षा से पहले ये प्रश्न और उनके कथित सही उत्तर किस माध्यम से बाहर पहुंचे और इसमें परीक्षा संचालन से जुड़े कौन-कौन से लोग शामिल थे।

मामले में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते की भूमिका को लेकर भी जांच चल रही है। पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ में 11वीं, 13वीं और 14वीं JPSC के विवादित परिणामों को लेकर तत्कालीन अध्यक्ष के निर्देश और दबाव का जिक्र सामने आया है। हालांकि, श्वेता गुप्ता ने खुद को तकनीकी हेरफेर से अलग बताया है और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की बात कही है।

विवाद सामने आने के बाद राज्य सरकार ने JSSC-CGL समेत 22 भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द किया, छह को स्थगित किया और 17 अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा। CID और SIT की जांच में अब तक कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, JSSC-CGL मामले की जांच के लिए SIT का विस्तार भी किया गया है और 37 संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है।

इस पूरे मामले ने झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठन लंबे समय से मामले की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। 26 दिन तक चले आंदोलन के बाद छात्रों ने फिलहाल प्रदर्शन स्थगित करते हुए सरकार को दो महीने का समय दिया है, लेकिन जांच में सामने आ रहे नए आरोपों ने विवाद को फिर गहरा कर दिया है।

अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों के बयानों को मूल OMR शीट, डिजिटल रिकॉर्ड, फॉरेंसिक रिपोर्ट और कथित वित्तीय लेन-देन से जोड़कर ठोस साक्ष्य के रूप में स्थापित करना है। अगर जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला केवल एक परीक्षा में अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि झारखंड की भर्ती व्यवस्था में कथित संगठित नेटवर्क की तस्वीर सामने आ सकती है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

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