नेपाल-तिब्बत सीमा पर फ्लैश फ्लड से तबाही, कैलाश यात्रा के 77 तीर्थयात्रियों से संपर्क टूटा

News Desk

नई दिल्ली। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई अचानक बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे तीर्थयात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में अचानक आई बाढ़ की चपेट में कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहा एक समूह आ गया। इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद 77 तीर्थयात्रियों के बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है। बाढ़ से इमिग्रेशन सेंटर और आसपास का बड़ा इलाका प्रभावित हुआ है।

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने बुधवार को सोशल मीडिया के जरिए इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया उनका एक समूह वापसी के दौरान ग्यिरोंग के इमिग्रेशन सेंटर में रुका हुआ था। इसी दौरान अचानक आई बाढ़ ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ इतनी तेज थी कि इमिग्रेशन सेंटर की इमारत और आसपास का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया।

सद्गुरु ने कहा कि इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद 77 लोगों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। स्वयंसेवक और सपोर्ट टीमें स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं और प्रभावित इलाके तक पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान में मदद करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए अपने अन्य समूहों की स्थिति की भी जानकारी दी। सद्गुरु के मुताबिक, उनके 21 समूहों में शामिल 495 तीर्थयात्री सुरक्षित लौट चुके हैं। वहीं, 743 लोग अभी तिब्बत में और 148 लोग नेपाल में हैं। इसके अलावा 77 तीर्थयात्री ग्यिरोंग के इमिग्रेशन सेंटर में थे, जबकि नेपाल के तिमुरे में तीन स्वयंसेवक मौजूद थे।

नेपाल के रसुवा जिले और तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में आई इस आकस्मिक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल में भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई गांव और बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के साथ संचार और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। इसके चलते राहत एवं बचाव दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

बाढ़ के साथ कई इलाकों में भूस्खलन की भी सूचना है। नेपाल में पुलिस और सेना की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। वहीं, तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट इलाके में भी बचाव दल लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। खराब मौसम, मलबे और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।

इस बीच लापता तीर्थयात्रियों के परिवारों की चिंता बढ़ गई है। सद्गुरु ने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए भरोसा दिलाया है कि यात्रियों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, जब तक प्रभावित क्षेत्र से आधिकारिक जानकारी नहीं मिलती, तब तक 77 तीर्थयात्रियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकेगी।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल-तिब्बत सीमा का यह क्षेत्र पहले से ही चुनौतीपूर्ण माना जाता है। मानसून के दौरान अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। इस बार भी अचानक आई बाढ़ ने यात्रा मार्ग और सीमा क्षेत्र में मौजूद लोगों के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर दी है।

फिलहाल प्रशासन और राहत एजेंसियों का पूरा ध्यान प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों तक पहुंचने और लापता यात्रियों की जानकारी जुटाने पर है। 77 तीर्थयात्रियों के बारे में आधिकारिक जानकारी मिलने का इंतजार है। जैसे-जैसे बचाव अभियान आगे बढ़ेगा, उनकी स्थिति को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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