Jaipur : राजस्थान में प्रतिबंध के बावजूद ई-सिगरेट की बिक्री और कारोबार के आरोपों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि जयपुर शहर में ई-सिगरेट के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई। अदालत ने सरकार को 15 सितंबर 2026 तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति इंद्रजीत सिंह और न्यायमूर्ति संदीप तनेजा की खंडपीठ ने की।
मामला अधिवक्ता प्रियांशा गुप्ता की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में कानून बनाकर ई-सिगरेट के निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद प्रदेश में ई-सिगरेट की उपलब्धता बनी हुई है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर नाबालिगों द्वारा ई-सिगरेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये याचिका में लगाए गए दावे हैं, जिन पर अदालत में सुनवाई जारी है।
ताजा सुनवाई में हाईकोर्ट ने खास तौर पर जयपुर शहर में ई-सिगरेट के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है। सरकार को 15 सितंबर तक की कार्रवाई का रिकॉर्ड अदालत के समक्ष रखने को कहा गया है। इसका मतलब है कि अब संबंधित एजेंसियों को यह बताना होगा कि प्रतिबंधित उत्पाद की बिक्री या कारोबार के मामलों में कितनी कार्रवाई हुई, कितनी जब्ती की गई और किन मामलों में कानूनी कदम उठाए गए।
इस मामले में अदालत पहले भी प्रतिबंध को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दे चुकी है। हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को संबंधित कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। पुलिस महानिदेशक को सभी रेंज मुख्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों की विशेष टीम गठित करने को भी कहा गया था, ताकि प्रतिबंधित ई-सिगरेट के कारोबार पर कार्रवाई की जा सके।
अदालत ने जिला स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए थे। मुख्य सचिव को प्रत्येक जिले में कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी को अधिकृत करने के लिए कहा गया था, ताकि संबंधित कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी हो सके। ऐसे में जयपुर में हुई कार्रवाई का ब्यौरा अब इस बात का भी संकेत देगा कि प्रतिबंध को लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए गए।
भारत में Prohibition of Electronic Cigarettes Act, 2019 (PECA) के तहत ई-सिगरेट के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर प्रतिबंध है। ऐसे में अदालत के सामने अब मुख्य सवाल प्रतिबंध के अस्तित्व का नहीं, बल्कि उसके जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का है।
ई-सिगरेट को लेकर दायर जनहित याचिका में लगाए गए आरोपों और सरकार की ओर से की गई कार्रवाई—दोनों का रिकॉर्ड अब अदालत के सामने आएगा। इसलिए फिलहाल यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि प्रतिबंध के बावजूद कारोबार के मामलों में सरकार ने कार्रवाई नहीं की। हाईकोर्ट ने तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है।
अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर नजर रहेगी। रिपोर्ट में जयपुर शहर में ई-सिगरेट की बिक्री और कारोबार के खिलाफ उठाए गए कदमों का विवरण सामने आने के बाद अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है।