राजस्थान में जर्जर स्कूलों को लेकर नया विवाद, आशुतोष रांका ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को दी खुली चुनौती

News Desk

जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर चल रही बहस अब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका के बीच सीधे टकराव में बदलती नजर आ रही है। रांका ने शिक्षा मंत्री को चुनौती दी है कि वे अपने कार्यकाल में बने राजस्थान के 10 सबसे अच्छे सरकारी स्कूलों की सूची बताएं। उन्होंने कहा है कि बंगाल से लौटने के बाद वे अपनी टीम के साथ इन स्कूलों का दौरा करेंगे और यह भी देखेंगे कि सरकार जिन स्कूलों को बेहतर बता रही है, वहां वास्तव में क्या सुविधाएं हैं।

आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मदन दिलावर से कहा कि अगर शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में कम से कम 10 शानदार स्कूल बने हैं तो उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं। रांका का कहना है कि उनकी टीम राजस्थान के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति देखने के लिए दौरा करेगी। उनका आरोप है कि प्रदेश के कई स्कूलों में भवन, कक्षाओं और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है।

यह चुनौती ऐसे समय सामने आई है जब राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और बिना अनुमति फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 16 अगस्त को माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि बिना प्रधानाचार्य या संस्था प्रमुख की अनुमति के बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। स्कूल पहुंचने वाले आगंतुकों के लिए विजिटर रजिस्टर में एंट्री भी जरूरी होगी।

नए निर्देशों के मुताबिक, किसी बाहरी व्यक्ति को शिक्षक या अधिकृत स्टाफ के साथ के बिना क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी, हॉस्टल, खेल मैदान या अन्य छात्र गतिविधि वाले क्षेत्रों में जाने की अनुमति नहीं होगी। छात्रों और शिक्षकों की फोटो, वीडियो, इंटरव्यू या ऑडियो रिकॉर्डिंग के लिए भी पहले से लिखित अनुमति जरूरी होगी। आदेश में बच्चों की सुरक्षा और निजता से जुड़े नियमों का पालन करने पर जोर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, निजता और पढ़ाई के माहौल को बनाए रखना है। आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश करता है, रिकॉर्डिंग करता है या स्कूल के काम में बाधा डालता है और परिसर छोड़ने से इनकार करता है, तो स्कूल प्रशासन पुलिस और संबंधित शिक्षा अधिकारियों को सूचना दे सकता है।

इसी आदेश के बाद आशुतोष रांका ने अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को लेकर रुख और तेज कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति देखने का उनका अभियान जारी रहेगा और पुलिस कार्रवाई की परवाह किए बिना टीम स्कूलों का निरीक्षण करती रहेगी। रांका ने सरकार से जर्जर स्कूलों की मरम्मत कराने की मांग करते हुए कहा कि जब तक स्कूलों की बुनियादी स्थिति में सुधार नहीं होता, उनका अभियान बंद नहीं होगा।

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सवाल पहले भी उठते रहे हैं। हाल के वर्षों में जर्जर भवन, बिजली, पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें कई जिलों से सामने आई हैं। इसी पृष्ठभूमि में सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति और शिक्षा विभाग के दावों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस बनी हुई है।

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