अशोक गहलोत से मिले कानाराम सिंघल, राज्यसभा में स्थानीय चेहरों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग

News Desk

Jaipur : राजस्थान कांग्रेस में राज्यसभा के लिए स्थानीय चेहरों को प्राथमिकता देने की मांग फिर उठी है। युवा कांग्रेस नेता और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव (उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ) कानाराम सिंघल ने गुरुवार को जयपुर स्थित सिविल लाइंस आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। इस दौरान सिंघल ने गहलोत को मांग पत्र सौंपते हुए राजस्थान कोटे से राज्यसभा भेजे जाने वाले नेताओं में प्रदेश के स्थानीय चेहरों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग रखी।

सिंघल का तर्क है कि राजस्थान से जुड़े स्थानीय नेता प्रदेश के पानी, किसानों, युवाओं, रोजगार, उद्योग और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को संसद के उच्च सदन में ज्यादा प्रभावी ढंग से उठा सकते हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने यह भी सुझाव रखा कि राजस्थान से राज्यसभा उम्मीदवार तय करते समय स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव को एक महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना चाहिए।

यह मांग ऐसे समय उठी है जब जून 2026 में राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों का चुनाव पूरा हो चुका है। BJP के सतीश पूनिया और अलका गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी निर्विरोध निर्वाचित हुए। इसके साथ ही राजस्थान से राज्यसभा में BJP और कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 5-5 बनी हुई है।

राजस्थान विधानसभा की मौजूदा सूची के मुताबिक राज्य से राज्यसभा में BJP के घनश्याम तिवाड़ी, चुन्नीलाल गरासिया, मदन राठौड़, सतीश पूनिया और अलका सिंह हैं। कांग्रेस की ओर से रंजीत सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद कुमार, सोनिया गांधी और नीरज डांगी राज्यसभा सदस्य हैं। इनमें कांग्रेस के नीरज डांगी को राजस्थान का स्थानीय चेहरा माना जाता है, जबकि बाकी चार सदस्य दूसरे राज्यों से राजनीतिक रूप से जुड़े रहे हैं।

इसी मौजूदा प्रतिनिधित्व को आधार बनाकर सिंघल ने कांग्रेस के भीतर स्थानीय बनाम बाहरी प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि राजस्थान के हिस्से में आने वाली राज्यसभा सीटों में स्थानीय नेताओं को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए, ताकि प्रदेश के जमीनी मुद्दों की संसद में सीधी और निरंतर आवाज बनी रहे।

सिंघल ने अपने मांग पत्र में तीन प्रमुख सुझाव रखे हैं। पहली मांग यह है कि राजस्थान के कोटे से कांग्रेस के हिस्से में आने वाली पांच राज्यसभा सीटों में कम से कम तीन सीटों पर राजस्थान के मूल निवासी नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया जाए। उनका कहना है कि इससे प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों को राष्ट्रीय राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।

दूसरी मांग यह है कि यदि किसी दूसरे राज्य से जुड़े नेता को राजस्थान से राज्यसभा भेजा जाता है तो उनके लिए राजस्थान में नियमित प्रवास और संगठन के साथ संवाद की व्यवस्था हो। सिंघल ने इसके लिए साल में कम से कम 100 दिन राजस्थान में रहने तथा सभी संभागों में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ संवाद का सुझाव दिया है।

तीसरी मांग सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी MPLADS से जुड़ी है। सिंघल ने सुझाव दिया है कि राजस्थान कोटे से चुने गए ऐसे सांसदों की स्थानीय क्षेत्र विकास निधि का इस्तेमाल प्रदेश में ही किया जाए और उसके उपयोग का विवरण हर छह महीने में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के साथ साझा किया जाए।

सिंघल ने कहा कि राज्यसभा में स्थानीय प्रतिनिधित्व बढ़ने से युवाओं, किसानों, व्यापारियों और स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस पहल को संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने से भी जोड़ा और कहा कि प्रदेश के स्थानीय नेताओं को राष्ट्रीय मंच मिलने से कार्यकर्ताओं में भी राजनीतिक भागीदारी की भावना मजबूत होगी।

मुलाकात के दौरान सिंघल ने पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत के सामने इस प्रस्ताव को कांग्रेस के भीतर उचित मंच पर रखने का आग्रह किया। सिंघल के मुताबिक, गहलोत ने प्रस्ताव को उचित मंच पर उठाने और इसे AICC तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

राजस्थान में राज्यसभा की कुल 10 सीटें हैं और फिलहाल BJP-कांग्रेस का आंकड़ा 5-5 है। ऐसे में सिंघल की मांग का सीधा राजनीतिक संदर्भ कांग्रेस के अगले राज्यसभा चयन से जुड़ता है। हालांकि अभी अगली रिक्ति के लिए उम्मीदवार चयन का कोई औपचारिक कार्यक्रम सामने नहीं है, लेकिन पार्टी के भीतर स्थानीय प्रतिनिधित्व का यह मुद्दा आगे की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में चर्चा का विषय बन सकता है।

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