जयपुर। राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां सरकार को UCC बिल का ड्राफ्ट सौंपा जा चुका है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इसे लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने UCC को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को सदन में चर्चा के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार गंभीर मुद्दों पर बहस से बच रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष किसी भी चर्चा से भागने वाला नहीं है और UCC पर भी खुलकर बहस के लिए तैयार है।
जूली ने कहा कि देश का युवा अब जागरूक हो चुका है और वह धर्म या जाति की राजनीति के बजाय वास्तविक मुद्दों पर चर्चा चाहता है। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही नहीं दिखाई जा रही है और युवाओं से जुड़े सवालों पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहे।
इधर, राजस्थान में UCC को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। समान नागरिक संहिता समिति ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को विधेयक का प्रारूप सौंप दिया है। यह ड्राफ्ट करीब 14 लाख सुझावों के अध्ययन के बाद तैयार किया गया है।
प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, आदिवासी समुदाय को छोड़कर सभी धर्मों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु तय करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बहुविवाह पर रोक लगाने और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने जैसे सख्त नियम भी शामिल किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस विधेयक को तैयार करते समय उत्तराखंड और गुजरात के कानूनी प्रावधानों का अध्ययन किया गया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को भी ध्यान में रखा गया है। संवैधानिक कारणों से आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है।
दरअसल, UCC यानी समान नागरिक संहिता का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान कानून लागू करना है। इसके तहत अलग-अलग धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानूनी ढांचा बनाने की बात की जाती है।
इसमें विवाह पंजीकरण को अनिवार्य करना, तलाक के लिए समान प्रक्रिया, महिला और पुरुष को संपत्ति में बराबर अधिकार देना और बहुविवाह पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी दायरे में लाने के लिए नियम तय किए जा सकते हैं।
हालांकि, UCC का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को खत्म करना नहीं है, बल्कि नागरिक अधिकारों और पारिवारिक मामलों में समानता सुनिश्चित करना है।
राजस्थान में UCC को लेकर जहां सरकार इसे एक बड़ा कानूनी सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक एजेंडा करार दे रहा है। ऐसे में आने वाले समय में इस मुद्दे पर विधानसभा और राज्य की राजनीति में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।