नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा है कि जरूरत न होने पर सोना खरीदने से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल घूमने के लिए विदेश यात्रा करने की योजना है तो उसे टालने पर विचार करें और शादियां भी विदेश के बजाय भारत में आयोजित की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह बात मंगलवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक से जारी एक वीडियो संदेश में कही। वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में देश की अर्थव्यवस्था और घरेलू मांग का जिक्र करते हुए लोगों से ऐसे खर्चों को प्राथमिकता देने की अपील की, जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा पहुंचे। उन्होंने कहा कि देश में बने उत्पादों को ज्यादा महत्व देने से स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सोने को लेकर प्रधानमंत्री ने खास तौर पर कहा कि जब तक जरूरत न हो, तब तक इसकी खरीद से बचा जा सकता है। उनकी अपील ऐसे समय आई है जब सोना भारतीय परिवारों की बचत और पारंपरिक निवेश का एक बड़ा हिस्सा माना जाता है। प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि अनावश्यक खर्च को कम करके घरेलू अर्थव्यवस्था में मांग को मजबूत किया जाए।
विदेश यात्रा को लेकर भी प्रधानमंत्री ने लोगों से विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर यात्रा केवल घूमने के उद्देश्य से है, तो उसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। इसी तरह उन्होंने विदेश में शादी करने के बजाय भारत में ही समारोह आयोजित करने की बात कही। उनका संदेश साफ तौर पर घरेलू पर्यटन, स्थानीय कारोबार और देश के भीतर खर्च को बढ़ावा देने से जुड़ा रहा।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में युद्ध, संकट, सप्लाई चेन में रुकावट और अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की आर्थिक विकास दर का जिक्र करते हुए कहा कि अब इस गति को बनाए रखना जरूरी है।
मोदी ने कहा कि आज देश जो मेहनत कर रहा है, उसका असर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर पड़ेगा। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब युवा पीढ़ी के सामने एक मजबूत और विकसित भारत होना चाहिए। इसके लिए सरकार के प्रयासों के साथ आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक ओर देश तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं कुछ लोग निराशा का माहौल बनाकर हर तरफ झूठ फैला रहे हैं। उन्होंने इसके लिए ‘झूठ की गूंज’ शब्द का इस्तेमाल किया। इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे आर्थिक गतिविधियों में अपनी भूमिका को समझें और भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दें। उनका कहना था कि स्थानीय स्तर पर किया गया खर्च देश के कारोबार, रोजगार और उत्पादन को मजबूती देता है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब सरकार लगातार आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।
पीएम मोदी का यह वीडियो संदेश आर्थिक नीतियों के साथ-साथ रोजमर्रा के उपभोग को लेकर भी एक स्पष्ट अपील के रूप में सामने आया है। सोने की खरीद से लेकर विदेश यात्रा और विदेश में शादी तक, प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने खर्च के फैसलों में घरेलू अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।