राजस्थान हाईकोर्ट में बदलाव की आहट, जस्टिस संजय अग्रवाल को चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश; वकीलों का विरोध भी जारी

News Desk

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश पद को लेकर चल रही उठापटक के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बड़ा कदम उठाया है। कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। यह सिफारिश ऐसे समय हुई है, जब राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के कामकाज को लेकर विवाद चल रहा है और जयपुर से लेकर जोधपुर तक वकीलों का विरोध सामने आ चुका है।

जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा सितंबर 2025 से राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एस. श्रीराम के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें यह दायित्व सौंपा गया था। अब कॉलेजियम की नई सिफारिश के बाद राजस्थान हाईकोर्ट को नियमित मुख्य न्यायाधीश मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

विवाद की शुरुआत जस्टिस शर्मा के प्रशासनिक कामकाज को लेकर लगाए गए आरोपों से हुई। रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखे थे। इनमें प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग और मामलों की लिस्टिंग को प्रभावित किए जाने जैसे आरोपों का जिक्र किया गया था। जस्टिस मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट में किसी दूसरे हाईकोर्ट से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने और जस्टिस शर्मा के तबादले का अनुरोध किया था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें अभी आरोपों के रूप में ही देखा जा रहा है।

मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं में भी असंतोष बढ़ा। जयपुर और जोधपुर दोनों जगह वकीलों ने विरोध दर्ज कराया। जयपुर में अधिवक्ता कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अदालत के बाहर प्रदर्शन करते नजर आए, जबकि जोधपुर में वकील संगठनों ने न्यायिक कार्य से दूरी बनाने का फैसला किया। अधिवक्ताओं की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जांच पूरी होने तक विवाद से जुड़े पदों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर उचित कदम उठाए जाएं।

वकील संगठनों का कहना है कि उनकी चिंता किसी व्यक्ति विशेष से ज्यादा न्यायपालिका की पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर है। उनका तर्क है कि हाईकोर्ट के प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज पर उठे सवालों का समाधान स्पष्ट और निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए, ताकि न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा कायम रहे।

इसी दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की ओर से भी यह बात सामने आई कि किसी न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सीधे दोष साबित नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में संस्थागत प्रक्रिया के तहत जांच और संबंधित न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी है। इससे संकेत मिलता है कि मामले को न्यायिक व्यवस्था के तय प्रोटोकॉल के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है।

कॉलेजियम की सिफारिश में जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने के साथ एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी है। राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई है। इससे हाईकोर्ट स्तर पर होने वाले संभावित प्रशासनिक बदलावों की तस्वीर और स्पष्ट होती है।

जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के संदर्भ में यह भी महत्वपूर्ण है कि वे 26 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में कॉलेजियम की ताजा सिफारिश को राजस्थान हाईकोर्ट में नियमित नेतृत्व स्थापित करने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की अंतिम प्रक्रिया केंद्र सरकार की मंजूरी और राष्ट्रपति की नियुक्ति के बाद ही पूरी होगी।

फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट के सामने दो समानांतर घटनाक्रम चल रहे हैं। एक ओर नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर कॉलेजियम ने अपनी सिफारिश भेज दी है, वहीं दूसरी ओर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जुड़े आरोपों को लेकर वकीलों का विरोध और संस्थागत बहस जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कॉलेजियम की सिफारिश पर आगे क्या निर्णय होता है और राजस्थान हाईकोर्ट में चल रहे विवाद का संस्थागत स्तर पर किस तरह समाधान निकाला जाता है।

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