खाद्य कीमतों पर जयराम रमेश का केंद्र पर हमला, मसालों से दाल-तेल तक बढ़े दामों का दावा

News Desk

नई दिल्ली। रसोई में मसालों की खुशबू हो या दाल-तेल का हिसाब, इन दिनों महंगाई का गणित कांग्रेस को केंद्र पर निशाना साधने का नया मौका दे रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक महीने में कई मसालों के दाम 10 से 25 फीसदी तक बढ़े, जबकि दाल, खाद्य तेल और प्याज की कीमतों में भी तेजी आई है। रमेश ने सरकार से महंगाई पर तत्काल कदम उठाकर आम उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की।

रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में छोटी इलायची, बड़ी इलायची, जीरा और जावित्री जैसे मसालों के भाव में बढ़ोतरी का दावा किया। उनके मुताबिक छोटी इलायची 4,000 से बढ़कर 4,400 रुपये प्रति किलो, बड़ी इलायची 2,400 से 2,800 रुपये और जीरा 360 से 400 रुपये किलो पहुंच गया। जावित्री के दाम भी 2,500 से बढ़कर 3,000 रुपये प्रति किलो होने का दावा उन्होंने किया।

दालों के मामले में भी रमेश ने कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला दिया। उनके अनुसार अरहर दाल 100 से बढ़कर 130 रुपये किलो, चना दाल 70 से 100 रुपये और उड़द दाल 120 से 140 रुपये किलो हो गई। खाद्य तेलों में उन्होंने सरसों तेल का भाव 190 से बढ़कर 210 रुपये और सफोला तेल का भाव 240 से 280 रुपये प्रति लीटर होने का दावा किया। ये सभी आंकड़े रमेश की ओर से साझा किए गए आंकड़े हैं, जिन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

सरकारी आंकड़ों में तस्वीर थोड़ी अलग है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के Price Monitoring System के मुताबिक 20 सितंबर 2026 को अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत अरहर दाल की 122.81 रुपये प्रति किलो, चना दाल की 86.71 रुपये और उड़द दाल की 121.67 रुपये प्रति किलो थी। इसी दिन पैक्ड सरसों तेल का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 200.92 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। विभाग यह भी स्पष्ट करता है कि अलग-अलग केंद्रों पर वस्तु की गुणवत्ता और वैरायटी के कारण कीमतें अलग हो सकती हैं।

प्याज को लेकर रमेश का दावा सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव जून में 29.50 रुपये प्रति किलो था, जो सितंबर में बढ़कर 53.78 रुपये हो गया। उनके हिसाब से यह 82.3 फीसदी की बढ़ोतरी है। सरकारी Price Monitoring System में 20 सितंबर को प्याज का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 52.86 रुपये प्रति किलो दर्ज है, जो रमेश के सितंबर वाले आंकड़े के काफी करीब है।

महंगाई के इसी मुद्दे को लेकर रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि जरूरी खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बढ़ती कीमतों का असर खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के घरेलू बजट पर पड़ रहा है और सरकार को उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

हमले को राजनीतिक रंग देते हुए रमेश ने 1977 की फिल्म Hum Kisise Kum Nahin के चर्चित गीत ‘क्या हुआ तेरा वादा’ का भी जिक्र किया। गीत के बहाने उन्होंने महंगाई के मुद्दे पर केंद्र से सवाल किया। यह रमेश की राजनीतिक टिप्पणी है, जबकि कीमतों के वास्तविक स्तर को अलग-अलग सरकारी और बाजार आंकड़ों के संदर्भ में देखना जरूरी है।

खाद्य तेलों की कीमतों को लेकर सरकार के सामने चुनौती जरूर बनी हुई है। 16 सितंबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र बढ़ती घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती के विकल्प पर विचार कर रहा था। भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का करीब दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात लागत का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। हालांकि, प्रस्तावित बदलाव पर उस समय सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी।

यानी फिलहाल महंगाई की बहस में दो तस्वीरें साथ-साथ हैं—कांग्रेस की ओर से बढ़ते बाजार भाव का मुद्दा और सरकारी निगरानी आंकड़ों में दर्ज अखिल भारतीय औसत कीमतें। आने वाले त्योहारी सीजन से पहले खाद्य तेल और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतें सरकार के लिए भी अहम मुद्दा बनी हुई हैं। रसोई का बजट आखिरकार ऐसा हिसाब है, जिसमें आंकड़ों की बहस के बीच अंतिम जोड़-घटाव उपभोक्ता की जेब ही करती है।

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