Tuesday, 12 May 2026
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महेश जोशी की गिरफ्तारी पर गहलोत की चेतवानी, कहा – सत्ता परमानेंट नहीं होती

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सत्ताधारी भाजपा पर तीखा प्रहार किया है। जेजेएम घोटाले के सिलसिले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के मामले को लेकर गहलोत ने भाजपा सरकार को जमकर ललकारा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्ता हमेशा बनी […]

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सत्ताधारी भाजपा पर तीखा प्रहार किया है। जेजेएम घोटाले के सिलसिले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के मामले को लेकर गहलोत ने भाजपा सरकार को जमकर ललकारा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्ता हमेशा बनी नहीं रहती और किसी को इसकी गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। सोमवार को एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने इस मुद्दे पर विस्तार से अपनी राय रखी। उन्होंने महेश जोशी की गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार देते हुए एसीबी और ईडी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। गहलोत का यह बयान राजस्थान की सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह न केवल स्थानीय घोटाले पर केंद्रित है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक रणनीतियों को भी निशाने पर लेता है।

गहलोत ने कहा कि महेश जोशी को सुबह के समय घर से उठाकर ले जाया गया, जैसे वे कहीं भाग रहे हों। वास्तव में ईडी ने उन्हें बुलाया था, जहां दो-तीन दिनों की पूछताछ के बाद गिरफ्तारी हुई। लेकिन एसीबी को कम से कम उन्हें नोटिस देकर बयान दर्ज कराने चाहिए थे। केवल डराने-धमकाने से काम नहीं चलेगा। गहलोत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर कोई भ्रष्टाचार में लिप्त है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह कितना ही करीबी क्यों न हो। लेकिन यह कार्रवाई ईमानदारी से हो, न कि गलत तरीके से। उन्होंने दोहराया कि सत्ता परमानेंट नहीं है और जब सरकार बदलेगी तो वही अधिकारी बने रहेंगे। यह बयान भाजपा सरकार के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में कई पुराने मामलों को फिर से खोला जा रहा है। गहलोत ने यह भी इशारा किया कि जोशी जैसे नेताओं को निशाना बनाकर विपक्ष को कमजोर करने की साजिश रचने वालों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। राजस्थान की जनता ऐसी राजनीतिक चालबाजियों को भलीभांति समझती है।

एसीबी पर दबाव का आरोप: ईमानदार अधिकारी पछता रहे, दो गुटों में बंटी संस्था

अशोक गहलोत ने एसीबी की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए। एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने एसीबी के डीजी को ईमानदार और अच्छा अधिकारी बताया, लेकिन कहा कि वे पूरी तरह ऊपरी दबाव में काम कर रहे हैं। गहलोत के अनुसार, निचले स्तर के अधिकारी भी इसी दबाव का शिकार हैं। एसीबी में अब दो गुट बन चुके हैं- एक वे जो ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, और दूसरे वे जो दबाव में गलत कदम उठा चुके हैं। उन्होंने खुलासा किया कि दो-तीन अधिकारी ऐसे हैं, जो अपनी गलत कार्रवाइयों पर पछता रहे हैं और रातों को नींद नहीं आती। गहलोत ने कहा कि ऐसी स्थिति प्रशासन के भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने कभी ऐसी हालत नहीं देखी। यह आरोप एसीबी की स्वायत्तता पर सीधा सवाल खड़ा करता है। राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के मामलों को राजनीतिक हथियार बनाने का इल्जाम लगाते हुए गहलोत ने अपील की कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। अगर यह दबाव जारी रहा तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर हो जाएंगी। राजस्थान जैसे राज्य में जहां भ्रष्टाचार के कई बड़े मामले लंबे समय से लटके हैं, गहलोत का यह बयान विपक्ष को मजबूत करने का प्रयास लगता है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे दबाव में न आएं, क्योंकि सत्ता का चक्र चलता रहता है।

विपक्ष का एकजुट होना जरूरी: भाजपा को सांप्रदायिक बताते हुए देश बचाने की अपील

पूर्व सीएम ने राष्ट्रीय राजनीति पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब भाजपा के खिलाफ सभी विपक्षी दल एकजुट हों। यह लड़ाई अब केवल कांग्रेस बनाम भाजपा नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष बनाम भाजपा है। गहलोत ने इसे देश को बचाने का सवाल बताया। दुनिया भर में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जो बेहद खतरनाक है। भाजपा को सांप्रदायिक पार्टी करार देते हुए उन्होंने कहा कि उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देना चाहिए। सभी दलों को निजी स्वार्थ त्यागकर आगे आना होगा। यह बयान हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के मद्देनजर महत्वपूर्ण है, जहां विपक्षी एकता की चर्चा जोरों पर है। गहलोत ने याद दिलाया कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका अहम है और इसे कमजोर करने की कोई कोशिश बर्दाश्त नहीं की जा सकती। राजस्थान से निकलकर यह संदेश राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों को एकजुट करने का प्रयास लगता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विपक्ष कमजोर हुआ तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में पड़ जाएगी।

पीएम मोदी के बयानों पर तीखी टिप्पणी: सोना न खरीदने की सलाह को बताया शर्मनाक

गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयानों की भी कड़ी आलोचना की। पीएम के विदेश यात्राएं न करने और सोना न खरीदने की सलाह पर उन्होंने कहा कि देशवासियों के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आखिर देश में ऐसी क्या परिस्थितियां बन रही हैं कि सोना खरीदने से मनाया जा रहा है? गहलोत ने बताया कि पीएम के इस बयान की पूरे देश में निंदा हो रही है। उन्होंने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने चुनाव समाप्त होते ही दरें बढ़ने की चेतावनी दी थी, जो सही साबित हो रही है। पीएम ने खुद ऐसी स्थिति पैदा की है। गहलोत ने राहुल की बात को गंभीरता से लेने की सलाह दी। यह टिप्पणी आर्थिक नीतियों और महंगाई के मुद्दे पर केंद्रित है। जनता महंगाई से जूझ रही है और पीएम का बयान इसे और हवा दे रहा है। गहलोत ने इसे सरकार की नाकामी का प्रतीक बताया।

बंगाल चुनाव को लोकतंत्र पर कलंक: 27 लाख वोटों को वंचित करना हत्या के समान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को गहलोत ने देश के लिए कलंक करार दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह चुनाव कलंक के रूप में ही दर्ज होगा। भाजपा ने धनबल का खुला इस्तेमाल किया। पूरे देश के चुनाव में साढ़े तीन लाख पैरामिलिट्री फोर्स लगी, लेकिन बंगाल में अकेले ढाई लाख तैनात कर दी गईं। सबसे शर्मनाक बात यह कि 27 लाख वैध वोटरों को वोट डालने से वंचित कर दिया गया। गहलोत ने पूछा कि किसी को वोट का अधिकार कैसे छीना जा सकता है? चुनाव स्थगित करके पहले इन वोटों का फैसला होना चाहिए था। उन्होंने इसे लोकतंत्र में हत्या के बराबर बताया। भाजपा की देश-दुनिया में आलोचना हो रही है। गहलोत ने पीएम के पुराने बयानों का जिक्र किया- पहले कांग्रेस मुक्त भारत, फिर विपक्ष मुक्त भारत। अगर विपक्ष ही न रहा तो लोकतंत्र कैसे बचेगा? हालांकि, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को भी भाजपा की एंट्री का जिम्मेदार ठहराया। यह विश्लेषण बंगाल चुनाव की विवादास्पद घटनाओं को रेखांकित करता है।

ध्रुवीकरण की राजनीति पर प्रहार: 2014 में 31% वोट, 69% विरोध में भी हिंदू थे

अंत में गहलोत ने भाजपा की ध्रुवीकरण वाली राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के नाम पर वोट मांगना जुमलेबाजी है। क्या हम हिंदू नहीं हैं? 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को महज 31 प्रतिशत वोट मिले थे, बाकी 69 प्रतिशत उसके खिलाफ पड़े। क्या उन 69 प्रतिशत में हिंदू नहीं थे? गहलोत ने लोगों से अपील की कि भड़काऊ बयानों में न आएं। भाजपा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनता समझदार है। यह बयान राष्ट्रीय राजनीति के मौजूदा परिदृश्य को दर्शाता है, जहां सांप्रदायिक मुद्दे अक्सर चुनावी केंद्र बिंदु बनते हैं। गहलोत ने जोर देकर कहा कि असली मुद्दे विकास, रोजगार और भ्रष्टाचार हैं, न कि धर्म का दुरुपयोग।

अशोक गहलोत का यह बयान राजस्थान से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल मचा रहा है। जेजेएम घोटाले से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों तक他们的 टिप्पणियां विपक्ष की रणनीति को मजबूत करती नजर आ रही हैं। भाजपा सरकार को अब इन आरोपों का जवाब देना होगा। क्या यह सियासी जंग और तेज होगी? आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।

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