जयपुर। राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने सोमवार को निकाय और पंचायत चुनाव से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर EVM की जांच, भंडारण, सुरक्षा और मतदान के बाद मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम में रखने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए।
प्रदेश के 39 जिलों में निकाय चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे, जबकि फलोदी और सलूंबर में एक ही चरण में चुनाव होगा। इस बीच 13 अगस्त को जयपुर के जवाहर लाल नेहरू मार्ग स्थित पंचायती राज संस्थान में निकाय और जिला प्रमुखों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इस लॉटरी के बाद महापौर, सभापति, अध्यक्ष और जिला प्रमुख के पदों के लिए आरक्षण की स्थिति साफ हो जाएगी, जिसका सीधा असर स्थानीय चुनाव की सियासत पर पड़ेगा।
EVM की सुरक्षा को लेकर निर्वाचन आयोग ने जिला कलेक्टरों को खास सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। मतदान में इस्तेमाल होने वाली मशीनों को सुरक्षित भंडारण कक्ष में रखा जाएगा और स्ट्रॉन्ग रूम के प्रवेश द्वार को डबल लॉक सिस्टम से सुरक्षित किया जाएगा। यहां पुलिस और सुरक्षा गार्डों की तैनाती रहेगी। EVM को लाने-ले जाने से लेकर स्ट्रॉन्ग रूम को खोलने और बंद करने तक की पूरी प्रक्रिया की लॉग बुक में जानकारी दर्ज की जाएगी।
चुनाव आयोग के मुताबिक, EVM की आवाजाही पर सॉफ्टवेयर के जरिए भी नजर रखी जाएगी। प्रत्येक कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट के यूनिक नंबर, मॉडल और संख्या जैसी जानकारी स्थायी स्टॉक रजिस्टर में दर्ज होगी। इसके साथ ही यह पूरा रिकॉर्ड राज्य निर्वाचन आयोग के EVM ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर में भी दर्ज किया जाएगा। इससे किसी भी मशीन की लोकेशन और मूवमेंट को ट्रैक किया जा सकेगा।
EVM की प्रथम स्तरीय जांच भी जिला स्तर पर कराई जाएगी। इस प्रक्रिया में इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे, जबकि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी जांच के दौरान आमंत्रित किया जाएगा। जांच की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जांच में शामिल अधिकारियों को मोबाइल फोन, कैमरा और स्थायी पेन ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
मतदान से पहले मशीनों की विश्वसनीयता जांचने के लिए मॉक पोल भी कराया जाएगा। जिले में उपलब्ध कुल EVM में से 10 प्रतिशत मशीनों पर 25-25 वोट डालकर मॉक पोल किया जाएगा। इसके बाद मशीनों को पिक पेपर सील से सील किया जाएगा। चुनावी प्रशिक्षण के लिए भी कुल मशीनों में से 5 प्रतिशत मशीनों को अलग रखा जाएगा। पहले जिला स्तर और फिर नगर पालिका स्तर पर मतदान कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मतदान के बाद EVM की सुरक्षा को लेकर भी आयोग ने विस्तृत व्यवस्था तय की है। मतदान के बाद सभी मशीनों को रिटर्निंग अधिकारी की निगरानी में स्ट्रॉन्ग रूम में सीलबंद रखा जाएगा। स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाए जाएंगे और वहां पर्याप्त संख्या में अग्निशमन उपकरण भी उपलब्ध रहेंगे। स्ट्रॉन्ग रूम और मतगणना परिसर में दोहरे स्तर की सुरक्षा व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, 13 अगस्त को होने वाली आरक्षण लॉटरी ने राजस्थान की स्थानीय राजनीति को भी गर्म कर दिया है। महापौर, सभापति, अध्यक्ष और जिला प्रमुख के पदों का आरक्षण तय होने के बाद कई नेताओं की दावेदारी और चुनावी रणनीति स्पष्ट होगी। अलग-अलग जिलों में नेता अपनी-अपनी राजनीतिक संभावनाओं को लेकर लॉटरी के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
अलवर जैसे जिलों में आरक्षण को लेकर खास उत्सुकता है। फिलहाल अलवर में जिला प्रमुख का पद OBC और महापौर का पद सामान्य वर्ग के पास है। वहीं, नए जिलों के गठन के बाद जिला परिषद के समीकरण भी बदले हैं। ऐसे में इस बार जिला प्रमुख की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होती है, इसका असर कई नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है।
निकाय चुनाव से पहले वार्डों के आरक्षण की लॉटरी की तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में 13 अगस्त को होने वाली पहली बड़ी लॉटरी के बाद ही स्थानीय चुनाव की तस्वीर और ज्यादा साफ होगी। आरक्षण तय होते ही राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट जाएंगे।
फिलहाल, राजस्थान में चुनावी तैयारियों के साथ सियासी हलचल भी तेज हो गई है। एक तरफ निर्वाचन आयोग EVM की सुरक्षा और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल आरक्षण की स्थिति के आधार पर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। 13 अगस्त की लॉटरी के बाद प्रदेश के निकाय चुनाव को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है।