Jaipur : जयपुर में नगर निगम चुनाव का नतीजा सामने आने के बाद भी चुनावी कहानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। EVM की तकनीकी गड़बड़ी ने पांच जगहों पर चुनावी गणित को फिर से मैदान में उतार दिया है। बुधवार को जयपुर नगर निगम के संबंधित मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग शुरू हो गई है। सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाली इस री-पोलिंग के बाद ही उन वार्डों की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी, जहां पहले मतदान के दौरान तकनीकी दिक्कत के चलते वोट प्रभावित हुए थे।
राजनीति में आमतौर पर नतीजे आने के बाद नेता जीत-हार का हिसाब लगाने लगते हैं, लेकिन जयपुर में फिलहाल कुछ सीटों पर हिसाब-किताब दोबारा शुरू हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद वार्ड 9 के बूथ नंबर 111, वार्ड 18 के बूथ नंबर 235, वार्ड 25 के बूथ नंबर 343 और वार्ड 34 के बूथ नंबर 477 व 484 पर फ्रेश पोल कराया जा रहा है। यानी इन बूथों पर मतदाताओं को एक बार फिर वोट डालने का मौका मिला है और उम्मीदवारों को भी अपनी चुनावी किस्मत का एक और इंतजार।
मामला सिर्फ मशीन खराब होने तक सीमित नहीं था। आयोग की जांच में यह सामने आया कि तकनीकी गड़बड़ी से प्रभावित होने वाले वोटों की संख्या संबंधित मुकाबलों में जीत और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच के अंतर से ज्यादा थी। ऐसे में पुराने मतदान के आधार पर परिणाम को अंतिम रूप देना संभव नहीं माना गया और दोबारा मतदान का फैसला लिया गया।
री-पोलिंग के दौरान संबंधित बूथों पर नई प्रक्रिया के तहत मतदान कराया जा रहा है। आयोग के निर्देशों के मुताबिक पुराने मतदान की अमिट स्याही के निशान को नजरअंदाज करते हुए दोबारा स्याही लगाई जाएगी और नए मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाएगा। मतदान खत्म होने के बाद 17 सितंबर को सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी। इसके बाद ही इन बूथों से जुड़े वार्डों के अंतिम परिणाम सामने आएंगे।
जयपुर नगर निगम में कुल 150 वार्ड हैं। अब तक घोषित परिणामों में BJP ने 78 वार्ड जीते हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 53 और निर्दलीयों के खाते में 15 सीटें गई हैं। यानी बहुमत का आंकड़ा 76 होने के कारण BJP का बोर्ड बनाने का आंकड़ा पहले ही पूरा दिख रहा है, लेकिन री-पोलिंग वाले वार्डों के नतीजे फिर भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया का अंतिम हिसाब इन्हीं के बाद पूरा होगा।
दिलचस्प बात यह है कि वार्ड 62 में भी इससे पहले री-पोलिंग हो चुकी है, जहां दोबारा मतदान में 76.32 फीसदी वोट पड़े थे। यह आंकड़ा जयपुर के मूल मतदान के करीब 65 फीसदी मतदान प्रतिशत से काफी ज्यादा रहा। यानी जहां पहली बार मतदान खत्म होने के बाद कहानी शांत होती दिख रही थी, वहां री-पोल ने मतदाताओं को फिर बूथ तक पहुंचा दिया।
जयपुर ही नहीं, EVM की तकनीकी गड़बड़ी का असर राज्य के दूसरे शहरी निकायों तक भी पहुंचा है। जयपुर के अलावा जोधपुर, कोटा और सुकेत में भी री-पोलिंग के आदेश दिए गए हैं। कुल 10 मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को दोबारा वोटिंग और 17 सितंबर को मतगणना का कार्यक्रम है।
इसका सीधा असर अब आगे की चुनावी प्रक्रिया पर भी पड़ा है। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव लंबित परिणामों के चलते टाल दिए गए हैं। पहले बाकी 305 शहरी निकायों के अध्यक्ष पद के चुनाव 21 और 22 सितंबर को तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं, जबकि इन तीनों नगर निगमों और सुकेत के लिए री-पोल के बाद अलग से प्रक्रिया पूरी की जानी है।
यानी जयपुर में पार्षदों का चुनाव भले हो चुका हो, लेकिन कुछ बूथों पर EVM ने चुनावी कहानी का आखिरी पन्ना अभी खुला छोड़ा है। अब 16 सितंबर की वोटिंग और 17 सितंबर की मतगणना के बाद ही यह अध्याय पूरी तरह बंद होगा।