नेहा जैन

25 साल की मुमुक्षु नेहा की भागवत दीक्षा सोमवार को हुई. साध्वी सुनिधि और डॉ. सुप्रतिभा के सानिध्य में श्रमण संघ के आचार्य डॉ. शिव मुनि महाराज ने नेहा जैन को वर्चुअल माध्यम से दीक्षा दिलाई और नया नाम साध्वी शुभांगी दिया. अब नेहा जैन साध्वी शुभांगी के रूप में धर्म के मार्ग पर चलेंगी.


जयपुर. वर्धमान जैन श्रावक संघ ज्योति नगर महिला मंडल के तत्वावधान में सोमवार को ज्योति नगर स्थित वर्धमान भवन में दीक्षा महोत्सव का आयोजन किया गया. साध्वी सुनिधि और डॉ. सुप्रतिभा के सानिध्य में नेहा जैन को दीक्षा दी गई.

सोमवार सुबह मुमुक्षु नेहा का वरघोड़ा निकाला गया. पूर्व न्यायाधीश जेके रांका के ध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई. दीक्षा पाठ आचार्य डॉ. शिव मुनि की ओर से कराया गया. नेहा बठिंडा की रहने वाली हैं. सोमवार सुबह धर्म के माता-पिता हीना और अमित हीरावत एवं लाभार्थी परिवार के बसंत हीरावत की मौजूदगी से नेहा का वरघोड़ा निकाला गया.

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नेहा के दीक्षा महोत्सव में पहुंची साध्वियों और डॉ. शिव मुनि ने आशीर्वचन भी दिए. कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप भंडारी ने बताया कि नेहा का जन्म 1996 में हुआ और वह 2019 से वैराग्य जीवन जी रही हैं. नेहा अब तक 2150 किलोमीटर पैदल विहार कर चुकी हैं.

दीक्षा ग्रहण करने के बाद साध्वी शुभांगी ने उपस्थित लोगों को आशीर्वचन भी दिए. दीक्षा से पहले नेहा की मेहंदी और केसर की रस्म भी की गयीं. दीक्षा समारोह में बड़ी संख्या में समाज के पुरुष और महिलाएं भी मौजूद रहीं.

जयपुर: आज के इस दौर में हर कोई पैसा कमाना चाहता है. चाहे कोई पढ़ा लिखा हो या अनपढ़, वो मेहनत कर पैसा कमाना चाहता है. ताकि, वो अपने साथ साथ अपने परिवार की इच्छाओं की पूर्ति कर सकें. इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें अपने वंश के जरिये पैसे मिल जाते हैं. जैसे खानदान की प्रॉपर्टी, जमीन व जायदाद. क्या आपने कभी सोचा है कि इस दौर में जब पैसा बहुत जरूरी हो गया है. ऐसे में जब आपके पास धन दौलत की कमी न हो. ऐशो आराम की जिंदगी हो. किसी चीज की कोई कमी न हो. तब क्या आप ये सब छोड़ छाड़कर एक साधारण जिंदगी जीना चाहेंगे? एक ऐसी ज़िंदगी जिसमें आपके पास कोई ऐसी वस्तु नहीं होगी जिससे आपको आराम मिलें. ऐसी ज़िंदगी जहां आपके परिवार आपके साथ नहीं होंगे. आप सोच रहें होंगे कि ऐसी ज़िंदगी कोई कैसे जी सकता है.

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